मेरी जुंबां-मेरी शायरी
दुआओं का सागर था जो दिल, दर्दे गम का समन्दर हो गया। जिन्हें सींचा था मैंने प्यार से, मैं उनकी ...
Dr. Purushottam Meena द्वारा 16 नवंबर, 2009 8:27:00 PM IST पर पोस्टेड
मेरी जुंबां-मेरी शायरी
दुआओं का सागर था जो दिल, दर्दे गम का समन्दर हो गया। जिन्हें सींचा था मैंने प्यार से, मैं उनकी ...
Dr. Purushottam Meena द्वारा 16 नवंबर, 2009 8:27:00 PM IST पर पोस्टेड
कविता : दुआएँ निकलती हैं!
कितना मूर्ख हूँ मैं भी ! जिन्हें, मेरे स्नेह, मेरे उत्पीड़न, मेरे उपहास, मेरे कोमल अहसास, मेरी ...
Dr. Purushottam Meena द्वारा 16 नवंबर, 2009 8:16:00 PM IST पर पोस्टेड
आगे पढ़ें... >>

लोड हो रहा है...